नम़ाज़ के बाद ज़िक्र व दुआ़ | Namaz ke baad zekr wa duaa in hindi
नम़ाज़ के बाद ज़िक्र व दुआ़ Third party image reference नमाज के बाद बहुत से अजकार और दुआओं के पढ़ने का हदीसो में जिक्र है । उनमें से जिस कदर पढ़ सके पढ़े । लेकिन जुहर व मगरिब और ईशा में तमाम वजीफे सुन्नतों से फारिग होने के बाद पढ़े । सुन्नत से पहले मुख्तसर दुआ पर कनाअत चाहिए वरना सुन्नतों का सवाब कम हो जाएगा इसका ख्याल रखें । ( रद्दलमुहतार ) फाइदा : - हदीसों में जिन दुआओं के बारे में जो तादाद मुकर्रर है उनसे कम या ज्यादा न करे । क्योंकि जो फ़जाइल इन दुआओं के हैं उन्हीं अददो के साथ मख़्सूस हैं । उनमें कमी बेशी करने की मिसाल यह है कि कोई ताला किसी खास किस्म की कुन्जी से से खुलता है तो अगर उस कुन्जी के दन्दाने कुछ कम या जाइद करदें तो उससे वह ताला न खुलेगा । हां अलबत्ता अगर गिनती शुमार करने में शक हो जाये तो ज्यादा कर सकता है । और यह ज्यादा करना गिनती बढ़ाने के लिए नहीं है । बल्कि गिनती को यकीनी तौर पर परी । है करने के लिए है । ( र द्द लमुहतार ) एक मस्नून वजीफा : - हर नमाज के बाद तीन बार इस्तिगफार और एक बार आयतुलकुर्सी और एक एक बार कुल हुवल्लाह और कु...


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