रकअतों की तादाद और नीयत का तरीका | Rkaaot ki taadat aur neyath ka trika in hindi

रकअतों की तादाद और नीयत का तरीका

 नीयत से मुराद दिल में पक्का इरादा करना है । खाली ख्याल काफी नही जब तक इरादा न हो ।

 मसलाः - अगर जबान से भी कह दे तो अच्छा है । मसलन यूं कि नीयत की मैंने दो रकअत फ़र्ज़े फ़ज़्र की वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरी तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

मसलाः - मुक़तदी हो तो नीयत में उसको इतना और कहना चाहिए कि पीछे इस इमाम के । 

मसलाः - इमाम ने इमाम होने की नीयत नहीं की । जब भी मुक़तदियों  की नमाज़ उसके पीछे हो जाएगी , लेकिन जमाअत का सवाब न पाएगा । अब हम तमाम नमाजों की रकअतों और उनकी नीयतों के तरीकों का अलग अलग सवाल व जवाब की सूरत में बयान करते हैं । इनको खूब अच्छी तरह याद कर लो ।

सवालः - फ़ज़्र के वक़्त कितनी रकअत नमाज़ पढ़ी जाती है ?

जवाब : - कुल चार रकअत । पहले दो रकअत सुन्नते मुअक्कदा फिर दो रकअत फ़र्ज़ । 

सवाल : - दो रकअत सुन्नत की नीयत किस तरह की जाएगी ? 

जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाज सुन्नते फ़ज़्र की अल्लाह तआला के लिए । सुन्नत रसूलुल्लाह की मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

सवाल : - दो रकअत फ़र्ज़ की नीयत किस तरह की जाएगी ?

 जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाजे फ़ज़्र की अल्लाह तआला के लिए ( मुकतदी इतना और कहे पीछे इस इमाम के ) मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ़ के अल्लाहु अक्बर ।

 सवाल : - ज़ुहर के वक़्त कुल कितनी रकअत नमाज़ पढ़ी जाती है ?

 जवाब : - बारह रकअ़त । पहले चार रकअ़त सुन्नते मुअक्कदा फ़र्ज़ । फिर दो रकअत सुन्नते मुअक्कदा फिर दो रकअत नफ्ल । 

सवालः - चार रकअत सुन्नत की नीयत किस तरह की जाएगी ?

 जवाब : - नीयत की मैंने चार रकअत नमाज़ सुन्नते ज़ुहर की अल्लाह तआला के लिए सुन्नत रसूलुल्लाह की मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

सवाल : - फिर चार रकअत फ़र्ज़ की नीयत किस तरह की जाएगी ?

 जवाब : - नीयत की मैंने चार रकअत नमाज फ़र्ज़े ज़ुहर की अल्लाह तआला के लिए ( मुक़दी इतना और कहे पीछे इस इमाम के ) मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर ।

 सवाल : - और दो रकअत सुन्नत की नीयत किस तरह की जाएगी ?

 जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ सुन्नत ज़ुहर की अल्लाह तआला के लिए सुन्नत रसूलुल्लाह की मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

सवाल : - फिर दो रकअत नफ्ल की नीयत कैसे करे ?

 जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ नफ़्ल की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

फाइदा : - नफ्ल नमाज़ बैठ कर पढ़ना भी जाइज़ है । लेकिन खड़े होकर नफ़्ल पढ़ने में दोगुना सवाब मिलता है और बैठ कर नफ़्ल पढ़ने में आधा सवाब मिलता है ।

 सवाल : - अस्त्र के वक़्त कुल कितनी रकअत नमाज़ पढ़ी जाती है ? 

जवाब : - आठ रकअत । पहले चार रकअत सुत्रते गैर मुअक्कदा , फिर चार रकअत फ़र्ज़ । 

सवाल : - चार रकअत सुन्नते गैर मुअक्कदा की नीयत किस तरह की जायेगी ?

 जवाब : - नीयत की मैंने चार रकअत सुन्नते अस्त्र की अल्लाह तआला के लिए सुन्नत रसूलुल्लाह की मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

सवाल : - फिर चार रकअत फ़र्ज़ की नीयत कैसे करे ? 

जवाबः - नीयत की मैंने चार रकअत नमाज़ फ़र्ज़े अस्त्र की अल्लाह तआला के लिए ( मुकतदी इतना और कहे पीछे इस इमाम के ) मुंह मेरा तरफ़ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर ।

 सवाल : - मगरिब के वक़्त कुल कितनी नमाज़ पढ़ी जाती है ?

 जवाब : - सात रकअत । पहले तीन रकअत फ़र्ज़ , फिर दो रकअत सुन्नते मुअक्कदा फिर दो रकअत नफ़्ल ।

 सवाल : - तीन रकअत फ़र्ज़ की नीयत किस तरह की जाएगी ? 

जवाब : - नीयत की मैंने तीन रकअत नमाज़ फ़र्ज़े मगरिब की अल्लाह तआला के लिए ( मुक़तदी इतना और कहे पीछे इस इमाम के ) मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

सवालः - और दो रकअत सुन्नते मुअक्कदा की नीयत कैसे करे ?

 जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ सुन्नते मगरिब की अल्लाह तआला के लिए सुन्नत रसूलुल्लाह की मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

 सवाल : - फिर दो रकअत नफ्ल की नीयत कैसे करे ?

 जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नफ्ल नमाज़ की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर ।

 सवाल : - इशा के वक़्त कुल कितनी रकअत नमाज पढ़ी जाती है ?

 जवाब : - सत्तरह रकअत । पहले चार रकअत सुन्नते गैर मुअक्कदा , फिर चार रकअत फ़र्ज़ । फिर दो रकअत सुन्नते गैर मुअक्कदा । फिर दो रकअत नफ़्ल फिर तीन रकअत वित्र वाजिब । फिर दो रकअत नफ़्ल । 

सवाल : - चार रकअत सुन्नते गैर मुअक्कदा की नीयत किस तरह की जाएगी ?

 जवाब : - नीयत की मैंने चार रकअत नमाज़ सुन्नते इशा की अल्लाह है तआला के लिए सुन्नत रसूलुल्लाह की मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर ।

  सवाल : - फिर चार रकअत फ़र्ज़ की नीयत कैसे करे ? 

जवाब : - नीयत की मैंने चार रकअत नमाज फ़र्ज़े इशा की अल्लाह तआला के लिए ( मुकतदी इतना और कहे पीछे इस इमाम के ) मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ़ के अल्लाहु अक्बर ।

 सवाल : - फिर दो रकअत सुन्नते मुअक्कदा की नीयत किस तरह ? 

जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाज सुन्नते इशा की अल्लाह तआला के लिए सुन्नत रसूलुल्लाह की मुंह मेरी तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

 सवाल : - फिर दो रकअत नफ्ल की नीयत किस तरह की जाएगी ? 

जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाजे नफ्ल की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

सवाल : - फिर वित्र की नीयत किस तरह की जाएगी ?

 जवाब : - नीयत की मैंने तीन रकअत नमाजे वाजिब वित्र की । अल्लाह तआला के लिए । मुंह मेरी तरफ कअबा शरीफ के अल्लाह अक्बर । 

सवाल : - फिर दो रकअत नफ़्ल की नीयत किस तरह करे ? 

जवाब : - नीयत की मैंने दो रकअत नमाजे नफ्ल की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ़ के अल्लाहु अक्बर ।

 सवालः - अगर नीयत के अलफ़ाज़ भूल कर कुछ के कुछ ज़बान से निकल गए तो नमाज़ होगी या नहीं ? 

जवाब : - नीयत दिल के पक्के इरादे को कहते हैं । यानी नीयत में जबान का एतबार नहीं । तो अगर दिल में मसलन जुहर का पक्का इरादा किया और जबान से जुहर की जगह अस्त्र का लफ्ज़ निकल गया तो जुहर की नमाज हो जाएगी । 

सवाल : - का़ज़ा नमाज़ की नीयत किस तरह करनी चाहिए ?

 जवाब : - जिस रोज़ और जिस वक़्त की नमाज़ कज़ा हो उस रोज़ और उस वक़्त की नीयत क़जा में जरूरी है । मसलन अगर जुमा के रोज़ फ़ज़्र की नमाज़ कज़ा हो गई तो इस तरह नीयत करे कि - नीयत की मैंने दो रकअत नमाजे कजा जुमा के फर्ज़े फ़ज़्र की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । 

सवाल : - अगर कई साल की नमाजें कजा हों तो नीयत कैसे करे ?

 जवाब : - ऐसी सूरत में जो नमाज़ मसलन ज़ुहर की नमाज़ कज़ा पढ़नी हो तो इस तरह नीयत करे कि नीयत की मैंने चार रकअत नमाजे कजा जो मेरे जिम्मा बाकी हैं , उनमें से पहले फर्ज़े जुहर की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा तरफ कअबा शरीफ के अल्लाहु अक्बर । इसी तरीके पर दूसरी कज़ा नमाज़ों की नीयतों को क़यास कर लेना चाहिए । 

सवाल : - पांच वक़्त की नमाज़ों में कुल कितनी रकअत क़जा पढ़ी जाये ?

 जवाब : - बीस रकअत दो रकअत फ़ज़्र , चार रकअत जुहर , चार रकअत अस्त्र , तीन रकअत मगरिब , चार रकअत इशा , तीन रकअत वित्र । खुलासा यह कि फ़र्ज़ और वित्र की क़जा है सुन्नतों और नफ्लों की क़ज़ा नहीं है । 

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