सज्दए सह्व् का बयान | Sajdae sahw ka bayaan in hindi

सज्दए सह्व् का बयान 

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जो चीजें नमाज में वाजिब हैं अगर उन में से कोई वाजिब भूल से छूट जाये तो उसकी कमी को पूरी करने के लिए सज्दए सह्व् वाजिब है । और इसका तरीका यह है कि नमाज़ के आखिर में अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद दाहिनी तरफ सलाम फेरने के बाद दो सज्दा करे और फिर अत्तहिय्यात और दुरूद शरीफ़ और दुआ पढ़ कर दोनों तरफ सलाम फेर दे । ( दुरै मुख़्तार जि . 1 स . 496 )

मसला : - अगर कुस्दन किसी वाजिब को छोड़ दिया तो सज्दए सह्व् में काफी नहीं बल्कि नमाज़ दोहराना वाजिब है । ( दुरै मुख्तार जि . 1 स . 496 )

मसला : - जो बातें नमाज़ में फ़र्ज़ हैं अगर उन में से कोई बात छूट गई तो नमाज़ होगी ही नहीं और सज्दए सह्व् से भी यह कमी पूरी नहीं हो सकती । ( आम्मए कुतुब ) बल्कि फिर से उस नमाज़ को पढ़ना ज़रूरी है । 

मसला : - एक नमाज़ में अगर भूल से कई वाजिब छूट गए तो एक मर्तबा वही दो सज्दे सह्व् के सब के लिए काफी हैं । चन्द बार सज्दए सह्व् की ज़रूरत नहीं । ( रदुलमुहतार जि . 1 स . 497 )  

मसला : - पहले कअदा में अत्तहिय्यात पढ़ने के बाद तीसरी रकअत के लिए खड़े होने में इतनी देर लगा दी कि अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिन् पढ़ सके तो सज्दए सह्व् वाजिब है । चाहे कुछ पढ़े या खामोश रहे दोनों सूरतों में सज्दए सह्व् वाजिब है । इस लिए ध्यान रखो कि पहले कअदा में  अत्तहिय्यात ख़त्म होते ही फौरन तीसरी रकअत के लिए खड़े हो जाओ । ( दुरै मुख्तार व रद्दुलमुहतार जि . 1 स . 498 ) 

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