कुंएं के मसाइल | Kuye ke masail in hindi

कुंएं के मसाइल

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कुंएं में किसी आदमी या जानवर का पाख़ाना , पेशाब या मुर्गी या बतख़ की बीट या ख़ून या ताड़ी , शराब वग़ैरह किसी नजासत का एक क़तरा भी गिर पड़े या कोई भी नापाक चीज़ कुंएं में पड़ जाये तो कुंआँ नापाक हो जाएगा और उसका कुल पानी निकाला जाएगा । 

मसलाः - अगर कुंएं में आदमी , गाय , भैंस , बकरी , या इतना ही बड़ा कोई जानवर गिर कर मर जाये । या छोटे से छोटा बहते ख़ून वाला जानवर कुंएं में मर कर फूल फट जाये या ऐसा जानवर जिसका जूठा नापाक है कुंएं में गिर पड़े अगरचे ज़िन्दा निकल आये जैसे सुअर , और कुत्ता तो इन सब सूरतों में कुआँ नापाक हो जाएगा और कुल पानी निकाला जाएगा ।

मुसला : - अगर बिल्ली या मुर्ग़ी या उतना ही बड़ा जानवर कुंवे में गिर कर मर जाये और फूलने फटने से पहले निकाल लिया जाये तो चालीस डोल पानी निकालना वाजिब और साठ डोल पानी निकाल देना मुस्तहब है । इतना पानी निकाल देने से कुआँ पाक हो जाएगा ।

मसला : - अगर चूहा , छिपकली , गिरगिट या उनके बराबर या उनसे छोटा जानवर कुंएं में गिर कर मर जाये और फूलने फटने से पहले निकाल लिया जाये तो बीस डोल पानी निकालना वाजिब और तीस डोल पानी निकालना मुस्तहब है । उसके बाद कुंआँ पाक हो जाएगा ।

मसला : - जिन जानवरों का जूठा पाक है । जैसे बकरी , गाय , भैंस , वग़ैरह इनमें से अगर कोई कुंएं में गिर पड़े और ज़िन्दा निकल आये और उनके बदन पर किसी नजासत का लगा होना मालूम न हो तो कुंआँ पाक है लेकिन इहतियातन बीस डोल पानी निकाल डालें ।

मसला : - हलाल परिन्दों जैसे कबूतर , गौरैया , मैना , मुर्ग़ाबी , वगैरह ऊँचे उड़ने वाले परिन्दों की बीट कुंएं में गिर जाये तो कुंआँ नापाक नहीं होगा । यूं ही चमगादड़ के पेशाब से भी कुंआँ नापाक न होगा । ( खानिया वगैरह )

मसलाः - जो हुक्म दिया गया है कि फ़लाँ फ़लाँ सूरत में इतना इतना पानी निकाला जाये तो उसका यह मतलब है कि जो चीज़ कुंएं में गिरी है पहले उसको कुंएं में से निकाल लें । फिर इतना पानी निकालें । अगर वह चीज़ कुंएं ही में पड़ी रही तो कितना ही पानी निकालें बेकार है । ( दु मुता , दुलहतार जि . 1 से 142 )

मसला : - जहां जहां इतने इतने डोल पानी निकालने का ज़िक्र आया हैं वहां डोल की गिनती उसी डोल से की जाएगी जो डोल उस कुंवे पर इस्तेमाल होता है । और अगर उस कुंएं का कोई ख़ास डोल न हो तो इतना बड़ा डोल होना चाहिए , जिस में सवा पांच (5 /14 ) किलो पानी आ जाये । ( दुरै मुख्तार जि . 1 से 145 ) सालन या पानी या शरबत में अगर मक्खी गिर पड़े तो उसको गोता देकर बाहर फेंक दे सालन पानी , शरबत , को खा पी लें । हदीस शरीफ में हैं कि अगर खाने में मक्खी गिर पड़े तो उसको खाने में गोता देकर मक्खी को फेंक दें । फिर उस खाने को खायें । क्योकि मक्खी के दो परों में से एक में बीमारी और दूसरे पर में उसकी शिफा है । और मक्खी उसी पर को खाने में डालती है जिसमें बीमारी होती है । इसलिए गोता देकर दूसरा शिफा वाला पर भी खाने में पहुंचा दें । ( मिश्कात जि 2 रु . 362 बाब मा यहिल्लु अकलु ) ।

मसला : - नापाक कुंएं में से जिस सूरत में जितने पानी निकालने का हुक्म है , जब उतना पानी निकाल लिया गया तो अब वह डोल और रस्सी और कुंएं की दीवारें सब ख़ुद ब--- ख़ुद पाक हो गईं । किसी को धोकर पाक करते की ज़रूरत नहीं । ( हिदाया स . 24 व रडुलमुहतार जि , 1 स . 142 ) 

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