नमाज सलातुल ---- असरार | Namaz slatul - asrar in hindi

नमाज सलातुल ---- असरार 

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दुआओं की मकबूलियत और हाज़तों के पूरी होने के लिए एक मुजर्रब नमाज़ सलातुल असरार भी है । जिसको इमाम अबुल हसन नूरुद्दीन अली बिन जरीर लख्मी शतनूफी ने बहजतुल असरार में और मुल्ला अली कारी व शैख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी ने हजरत गौसे आज़म रज़ियल्लाहु अन्ह से रिवायत करते हुए लिखा है । इसकी तर्कीब यह है कि मगरिब की नमाज के बाद सुन्नतें पढ़ कर दो रकअत नफ्ल पढ़े । और बेहतर यह है कि अल्हम्द के  बाद हर रकअत में ग्यारह ग्यारह मर्तबा कुल हुवल्लाह पढ़े । सलाम के बाद व अल्लाह तआला की हम्द व सना करे । फिर ग्यारह बार दुरूद शरीफ पढ़े । और ग्यारह मर्तबा यह पढ़े । फिर इराक की तरफ ग्यारह कदम चले और हर कदम पर यह पढ़े फिर हुजूरे अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को वसीला बना कर अल्लाह तआला से अपनी हाजत के लिए दुआ मांगे । ( अखबारुल अखियार स . 26 व नुजहतुलखातिर स . 78 ) 

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